गोंधळ

गोंधळ

अध्याय – 2 – श्लोक -7

Arjuna spoke unto the Lord:

Please, Dear Lord, I am your disciple, kindly guide and instruct me, for I have taken refuge and shelter in you.

I am confused as to my duties and what is good for me.

I beg you to give me knowledge, wisdom and a clear, logical mind.

इसलिये कायरतारूप दोष से उपहत हुए स्वभाववाला तथा धर्म के विषय में मोहित चित्त हुआ मैं आपसे पूछता हूँ कि जो साधन निश्चित कल्याणकारक हो, वह मेरे लिये कहिये ; क्योंकि मैं आपका शिष्य हूँ, इसलिये आपके शरण हुए मुझको शिक्षा दीजिये ।। ७ ।।

अध्याय – 3 – श्लोक -2

I am confused dear Lord, by the advice you have given to me. You have told me to take two opposite and different courses of action at once. Please, O KRISHNA, tell me of just one wise solution and course of action that would lead out of this problem safely.

आप मिले हुए वचनों से मेरी बुद्भि को मानो मोहित कर रहे हैं । इसलिये उस एक बात को निश्चित करके कहिये, जिससे मैं कल्याण को प्राप्त हो जाऊँ ।। २ ।।

अध्याय – 18 – श्लोक -61

The Blessed Lord explained:
O Arjuna, God dwells in the hearts of all beings just as He dwells in your heart. With His Almighty power, He moves and directs all living things in this world as if they were sitting on a machine that was moving them through time.

हे अर्जुन ! शरीर रूप यन्त्र में आरूढ़ हुए सम्पूर्ण प्राणियों को अन्तर्यामी परमेश्वर अपनी  माया से उनके कर्मों के अनुसार भ्रमण करता हुआ सब प्राणियों के ह्रदय में स्थित है ।। ६१ ।।

गोंधळ